05 Sep

भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी गणेश चतुर्थी के नाम से प्रसिद्ध है । इस दिन प्रातः काल स्नान करके , सोना , ताँबा , चाँदी ,मिट्रटी या गोबर के गणेश की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए । पूजा के समय इक्कीस व्यजंनों का भोग लगाना चाहिए । और हरित दूर्वा के इक्कीस अंकुर लेकर निम्न दस नामों पर चढाते हैं  -
1. गतापि ,
2. गोरी सुमन , 
3. अघनाशक , 
4. एकदन्त , 
5. ईशपुत्र , 
6. सर्वसिद्धिप्रद , 
7. विनायक , 
8. कुमार गुरु , 
9. इभवक्राय  और 
10. मूषक वाहन संत । 
इसके पश्चात इक्कीस लड्डुओं में से दस लड्डू ब्राह्मणों को दान में देने चाहिए और ग्यारह लड्ड़ू स्वयं ही सेवन करने चाहिए ।

पूजन व अन्य सामग्री

7 साबुत सुपारी

5 साबुत पान के पत्ते कलश हेतु

तांबे या पीतल का कलश/लोटा

अक्षत ( साबुत चावल )

3 नारियल

ताजे पुष्प

कलावा

इत्र

केले के पत्ते दूर्वा

हल्दी चन्दन टीके हेतु

कपूर, धूप व अगरबत्ती

गौ घृत का दीपक

शहद

गुड़

गंगा जल

5 अखरोट , 5 बादाम, 5 छुआरे, 5 काजू , 5 किशमिश आदि पंचमेवा

प्रसाद : लड्ड़ू मोदक

लाल वस्त्र बिछाने हेतु

 

श्रृंगार सामग्री

मुकुट

माला

भुजबन्ध

वस्त्र गणेश जी के

 

कुछ जरुरी बातें :

1. ध्यान रहे सपरिवार या सपत्नीक गणेश जी को आमंत्रित करके लाएं ।

2. गणेश जी की मूर्ति को शुद्ध करके कोरे लाल वस्र से ढक कर लाएं ।

3. कार में उन्हें सीट पर या अपनी गोद में रखकर ही लाएं ।

4. आप डेढ़, 3, 5, 7 या 11 दिन के लिए गणेश जी को आमंत्रित करने का संकल्प ले सकते हैं । यह संकल्प मूर्ति लाते समय या स्थापना के समय मन में ले सकते हैं । मगर ध्यान रहे की जितने दिन का संकल्प करके लाएं हैं उससे पूर्व विसर्जन न करें।  पर अधिक दिन रुकने के लिए गणेशजी से अनुनय विनय कर सकते हैं

5. जितने दिन गणेश जी घर में विराजमान रहें  घर को ताला लगाकर सपरिवार बाहर न जाएं । अगर आप दोनों ही कार्यरत हो तो गणेश जी को बोल कर     

5. जितने दिन गणेश जी घर में विराजमान रहें  घर को ताला लगाकर सपरिवार बाहर न जाएं । अगर आप दोनों ही कार्यरत हो तो गणेश जी को बोल कर कि ' हम इतने बजे तक आ जायेंगे ' जा सकते हैं । आपको यह भावना मन में रखनी है कि गणेश जी आपके घर में अतिथि बनकर विराजमान हैं ।

6. गणेश जी को दोनों आरती के समय लड्ड़ू , मोदक, फल व मेवे का प्रसाद अर्पित करें ।

7. घर में सात्विक भोजन बने व सर्वप्रथम थाली लगा कर गणेश जी को भोजन करें तत्पश्चात परिवार भोज करे।

8. गणेश जी लाते समय काल धागा पहना कर लाएं ।

गणेश जी विघ्न, क्लेश और चिंता को दूर करने वाले हैं यह विश्वास मन में रखें ।

श्री गणेश जी महाराज व्रत कथा