22 Sep

Kushmanda is the fourth form of the mother goddess and is worshipped on the fourth day of Navaratri. The meaning of the name ‘Ku-shm-anda’ is as follows: ‘Ku’ = a little; ‘ushma’ = ‘warmth’; ‘anda’ = ‘the cosmic egg’. So she is considered the creator of the universe. The universe was no more than a void full of darkness, until her light spreads in all directions like rays from the sun. Often she is depicted as having eight or ten hands. She holds weapons, glitter, rosary, etc., in her hands, and she rides a lion. The color to wear on the fourth day is Orange. 

माँ कुष्मांडा की पूजा इस मंत्र के उच्चारण से की जानी चाहिए

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

मां कुष्मांडा की पूजा। यहां पढ़ें मां चंद्रघंटा की आरती

कुष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥

पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी माँ भोली भाली॥

लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे॥

भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥

सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुँचती हो माँ अंबे॥

तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥

माँ के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥

तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो माँ संकट मेरा॥

मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥

तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥