08 Mar

यह पर्व फाल्गुन की पूर्णिमा को मनाया जाता है । होली के दिन सुबह पहले हनुमान जी और पितरो को धोक लगाएं । जल , रोली ,मौली , चावल , फूल ,  प्रसाद , नारियल चढ़ाएं । दीया धूप जलाएं और ठाकुर बाड़ी में घी धोकर मार लें । सबके टीका लगाएं । भैरों जी के नाम लेकर सब बच्चो को पैसे पर हाथ लगवाकर तेल मंगवाकर चौराहे पर रखवा दें और आप जिस देवता को मानते हों उसकी पूजा करें । यदि किसी बेटा हो या बेटे का विवाह का उद्यापन करना हो तो होली के दिन उद्यापन करें । तेरह जगह चार चार पूड़ी , थोड़ा सा हलवा रखकर अपनी इच्छानुसार रूपये रखकर हाथ फैरकर  सासूजी के पैर छूकर दें । सुपारी की माला घर में रखें । होली के आटे का हलवा , पूरी , बड़ा , साग , फली , करिया पापड़ बनाएं और देवताओं के नाम की थाली में निकल दें । भगवान का भोग लगाएं । निकली हुई थाली बामनी को दें । ब्राह्मण को भी जिमा दें ।  खुद जीमें ।

पूजन विधि - पहले जमीन पर थोड़ा सा गोबर और जल से चौका दें । चार औखली बीच में रखकर मालाएं सजा दें । जिस समय होली हो उस समय जेलमाला ( बड़कुल्ला की माला ) की पूजा करें । जितने मर्द हो उतने ही काठ के खांडा चढ़ाएं । जितने लड़के हों उतनी काठ की तलवार चढ़ायें और जेलमाला की पूजा करें । बाद में तलवार घर में रखें । जल , मौली , रोली , चावल , फूल ,  गुलाल गुड़ , पीसा , माला चढ़ाएं  दीया जलाकर , चार फेरी दें । उस जेलमाला में से चार जेलमाला  घर में रखें । सारी जेलमाला एक टोकरी में रखकर जहां होली जलती हो वहां ले जाएं और पूजा की सामग्री की थाली , कच्चे सूत की कुकड़ी ले जाएं । जब होली जलाएं तो थोड़ी सी अग्नि को कमरे में धूप कर लें । रात को ऊपर जा कर झल  दे के जल की घंटी से सात बार अर्घ्य दें । रोली , चावल चढ़ा दे । होली के चार गीत , बंधावे गायें । सासूजी के पैर छूकर रुपये दें । दूसरे दिन प्रसाद लें । अपने नौकर , जमादारनी को होली के रुपये दें ।