29 Sep

पर्व और त्यौहारों में मनुष्य और मनुष्य के बीच , मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य को सर्वाधिक महत्व प्रदान किया गया है । यहां तक कि उसे पूरे ब्रह्मांड के कल्याण से जोड़ दिया है । इनमें लौकिक कार्यो के साथ ही धार्मिक तत्वों का ऐसा समावेश किया गया है , जिससे हमें न केवल अपने जीवन निर्माण में सहायता मिले , बल्कि समाज की भी उन्नति होती रहे ।

पर्व और त्यौहार धर्म एवं आध्यात्मिक भावों को उजागर कर के लोक के साथ परलोक सुधार की प्रेरणा भी देते हैं । इस प्रकार मनुष्यों की आध्यात्मिक उन्नति में भी ये सहायक होते हैं । इसके अलावा ये घर परिवार के छोटे बड़े सभी सदस्यों को समीप लाने , मिल बैठने , एक दूसरे के सुख आनंद में सहभागी बनने का शुभ अवसर प्रदान करते हैं और मानवीय उदारता , समग्रता , प्रेम तथा भाईचारे का संदेश पहुंचाते हैं । सूक्ष्म रूप और त्यौहार में अंतर है । ' पर्व ' सामूहिक रूप से मनाया जाने वाला व्यापक स्तर का कृत्य है , जैसे दीपावली , होली आदि , जबकि त्यौहार इसकी उपेक्षा कम व्यापक स्तर पर मनाया जाने वाला कृत्य है , जैसे नवरात्र , शिवरात्रि , कार्तिकपूर्णिमा , मौनी अमावस्या आदि। इसी प्रकार जयंतियों को भी त्यौहार के अंतर्गत ही लिया जाता है ।

' त्यौहार ' शब्द ' तिथि वार ' शब्द  का ही अपभ्रंश है , क्योंकि सभी त्यौहार एक निश्चित तिथि और वार के योग पर ही आधारित होते हैं ।

हिंदूधर्म सदैव आशावादी रहा है । इसलिए हमारे त्यौहारों में विजय दिवस और महापुरषों के जयंती दिवसों को प्रमुख स्थान मिला , पराजय और निवार्ण दिवसों को स्थान नही मिला । कुछ त्यौहार तो सावदैशिक हैं , जो प्रायः  सभी प्रांतों में समान रूप से मनाए जाते हैं । और कुछ किसी   इन पर्वो और त्यौहारों  को  मनाने से आपसी भाईचारा , स्नेह सबंधं , सदाचरण आदि गुणों की वृद्धि तो होती है , ईश्वर व संस्कृति के प्रति श्रद्धाभाव भी जाग्रत होता है ।