04 Nov

गायत्री मंत्र की सबसे अधिक मान्यता क्यों ?

प्राचीन ग्रंथो के अनुसार गायत्री मंत्र के प्रथम अक्षर में सफलता , दूसरे में पुरुषार्थ, तीसरे में पालन , चौथे में कल्याण , पांचवें में योग , छठे में प्रेम , सातवें में लक्ष्मी , आठवें में  तेजस्विता , नवें में सुरक्षा , दसवें में बुद्धि , ग्यारहवें में दमन , बारहवें में निष्ठा , तेरहवें में धारणा , चौदहवें में प्राण , पंद्रहवें में संयम , सोलहवें में तप, सत्रहवें में दूरदर्शिता , अठारहवें में जागरण , उन्नीसवें में सृष्टि - ज्ञान , बीसवें में सफलता , इक्कीसवें में साहस , बाइसवें में दमन , तेइसवें में विवेक और चौबीसवें में सेवाभाव नाम की शक्तियों का समावेश है | गायत्री मंत्र का कार्य दुर्बुद्धि का निवारण कर सद्बुद्धि देना है | इस मंत्र के जपने से चुम्बक तत्व सक्रिय होकर प्रसुप्त क्षेत्रों को गतिशील कर देते हैं |

नास्ति गंगा समं तीर्थ देवः केशवात्परः |

गायत्र्यास्तु परं जाप्यं भूतं न भविष्यति ||

अर्थात् - गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं , केशव के समान कोई देव नहीं है | गायत्री से श्रेष्ठ न कोई जप हुआ न होगा | गायत्री मंत्र प्रणव ( ओंकार ) का विस्तृत रूप है |

इस मंत्रोच्चारण द्धारा ब्रह्मा के तेज की प्राप्ति होती है , इसलिए जहां भी गायत्री का वास होता है वहां यश कीर्ति , ज्ञान तथा दिव्य बुद्धि सहज से उपलब्ध हो जाती है |

गीता में भगवान् कृष्ण ने स्वंय कहा है -

‘गायत्री छन्दसामहाम्  |

अर्थात् मंत्रों में मैं गायत्री मंत्र हूं |

गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों में , 24 ऋषियों और देवताओं की शक्तियां समाहित मानी गई हैं | अतः मंत्रोच्चार से उन देवों से संबंधित शरीरस्थ नाड़ियों में प्राणशक्ति का स्पदंन शुरू हो जाता है | तथा संपूर्ण शरीर में आक्सीजन का संचार बढ़ जाता है | जिससे शरीर के समस्त विकार जल कर नष्ट हो जाते हैं |

शास्त्रों में कहा गया है कि गायत्रीमंत्र का श्रद्धा से विधानानुसार जप करने से शरीरिक , भौतिक तथा आध्यात्मिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है | जीवन में नई स्फूर्ति और आशाओं का संचार होता है | सद्विचार व सद्धर्म क उदय होता है | विवेकशीलता , आत्मबल , नम्रता , सयंम प्रेम , शांति , संतोष आदि सद्गुणों  की वृद्धि होती है और दुर्भाव दुख आदि नष्ट होते हैं | इसके अलावा आयु , संतान , विद्या , कीर्ति , धन और ब्रहमातेज की वृद्धि होकर आत्मा शुद्ध हो जाती है | यह अकालमृत्यु और सभी प्रकार के क्लेशों को नष्ट करता है |