03 Nov

कार्तिक पूर्णिमा

पुराणों में कहा गया है कि इसी तिथि पर शिवजी ने त्रिपुरा नामक राक्षस को मारा था इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं | इस तिथि को भगवान का मत्स्यावतार हुआ था |  इस  दिन गंगा स्नान , दीप दान आदि का विशेष महत्व है | इस दिन यदि कृतिका नक्षत्र हो तो महाकार्तिकी होती है , भरणी होने से विशेष फल देती है |

विधान :  " ॐ नमो भगवते वासुदेवाये " मंत्र से भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है | पांच दिनों तक लगातार घी का दीपक जलता रहना चाहिए | "ॐ विष्णवे नमः स्वाहा " मंत्र से घी , तिल और जी की 108 आहुतियां देते हुए वचन करना चाहिए |

भोग नं  1

ठाडे रहियो रे यशोदा जी के लाल कलेवा लाऊँ माखन का

भरा कटोरा दूध का , मिश्री देऊँ मिलाय

पीजा पीजा रे यशोदा जी के लाल , कलेवा लाई माखन का

आजा आजा रे यशोदा जी के लाल कलेवा

ठाडे रहियो रे यशोदा

भरी मटकिया छाछ की माखन देऊँ मिलाए

आजा खाजा रे यशोदा जी के लाल , कलेवा लाई माखन का

ठाडे रहियो रे

सुबह सवेरे मंदिर जाके भोग लगाऊँ

दर्शन देजा रे यशोदा जी के लाल , कलेवा लाई माखन का

आजा आजा रे यशोदा जी के लाल

ठाडे रहियो रे यशोदा जी के लाल

भोग नं 2

मोहन हमारे घर आये रुच  रुच भोग लगाये , जरा न शर्माये

कि मालिक है संसार का

भीलनी के बेर सुदामा के तंदुल , रुच रुच भोग लगाये

जरा न शर्माये कि मालिक है संसार का

मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरण कमल चित लाए

आकर दर्श दिखाए जरा न शर्माये कि मालिक है

संसार का मोहन हमारे

दुर्योधन की मेवा त्यागी साग बिदुर घर खाए , जरा ना

शरमाये कि मालिक है संसार का

आपकी वस्तु आपके आगे इसमें हमारा कुछ नहीं लागे

जरा न शरमाये कि मालिक है संसार का

इस भोग को जो भी खाये भवसागर से पार हो जाए

जरा न शर्माये कि मालिक है संसार का

मोहन हमारे घर आए