03 Apr

चैत्र मास में शुक्ल की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में कौशल्या की कोख से पुरूषोत्तम भगवन राम का जन्म हुआ था । भारतीय जन जीवन में यह पर्व एक बहुत ही महान पर्व के रूप में मनाया जाता है । इस दिन पुण्यसलितला सरयू नदी में स्नान करके लोग पुण्य का लाभ कमाते हैं ।

नवमी की रात्रि को रामचरित मानस का पाठ करना तथा सुनना चाहिए । अगले दिन भगवान राम का विधि पूर्वक पूजन करके ब्राहाणों को भोजन कराने के साथ ही उन्हें सामर्थ्यनुसार दान दक्षिणा देनी चाहिए ।

इस व्रत को करके हमें मर्यादा परुषोत्तम राम के चरित्र के आदर्शो को सहृदय  अपनाना चाहिए । भगवान राम की गुरु सेवा , जाति - पाँति का भेदभाव मिटना , शरणागत की रक्षा , भ्रातृ - प्रेम , मातृ - पितृ - भक्ति , एक पत्नी व्रत , पवनसुत हनुमान तथा अंगद की स्वामिभक्ति , गिद्धराज की कर्तव्यनिष्ठ तथा केवट आदि के चरित्रों की महानता को अपना चाहिए ।