12 Oct

गीता का रहस्य क्या है ?

गीता विशुद्ध रूप से कर्म के सिद्धांत को प्रतिपादित करती है । हे विशाल भुजाओं वाले अर्जुन ! सत्व , रज और तम , इन तीन गुणों वाली प्रकृति व्यक्ति से कर्म कराती है , किन्तु अहंकार से मोहित व्यक्ति स्वयं को कर्ता मान लेता है , परन्तु गुण विभाग को समझने वाला मनुष्य यही सोचकर कभी कर्मों में आसक्त नहीं होता कि गुणों को तो हम प्रयोग करते है , मै उनसे अलग हूं ।

प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणै: कर्माणि  सर्वशः

अहगांरविमूढात्मा  कर्ताहमिति मन्यते

तत्ववितु  महाबाहो गुणकमविभागयो :

गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते ।