02 Nov

कार्तिक माह में स्नान का माहात्म्य क्यों ?

कार्तिक माह के माहात्म्य के विषय में एक प्राचीन धारण मिलती है | कार्तिक स्नान ब्रहा के प्रति अर्चना है | विष्णु जी के प्रति किया गया स्नान उज्जैनी , त्रयम्बकेश्वर  और कावेरी तीर्थो में सपंन्न होते हैं | वहीं शिव के प्रति अर्पित स्नान हरिद्धार , कुरुक्षेत्र , रेणुका तीर्थ , गढ़गंगा , प्रयाग संगम , काशी व गया में किये जाते हैं | ब्रहा के लिए स्नान का एकमात्र स्थान तीर्थराज पुष्कर में निर्धारित हुआ है | पुष्कर का अर्थ एक ऐसे सरोवर से है , जिसकी रचना एक पुष्प से हुई थी |

सभी पवित्र तीर्थ स्थलों में जहां दीपावली पर्व की अमावस्या को यमराज की प्रसन्नता के लिए दीपदान किए जाते हैं , वहां रेणुका तीर्थ , गढ़गंगा , हरिद्धार , प्रयाग , काशी व पटना आदि में लोकाचार के अनुसार स्नान होते हैं | मान्यता है कि वैशाख स्नान और माघ स्नान से  निवृत हो जाएं , तो कार्तिक स्नान किए बिना उनका पुण्य नहीं मिलता है | स्नान करने का अभिप्राय यही है कि जब माघ स्नान, वैशाख स्नान और कार्तिक स्नान पूर्ण हो जाएं , तभी जाकर चार धाम का पुण्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है |

प्रिय पाठकों ! वैदिक यम नियम के अधीन हिन्दू जगत के 16 संस्कार और 10 कर्मो में एक कर्म स्नान भी है | प्रत्येक वर्ष वैशाख , कार्तिक और माघ मास में पूर्णिमाओं के मध्य पड़ने वाले पक्षों में पवित्र स्नान आयोजित होते हैं | धर्म की अधरशीलता में व्रत उपवास और तिथि पर्व पर पवित्र नदियों का स्नान महत्वपूर्ण है |

गंगा , यमुना , गोदावरी , सरस्वती , नर्मदा , सिन्धु और कावेरी - ये सात नदियां ऐसी हैं , जिनमे प्रतिवर्ष स्नानों के मध्य यात्रा करके अवश्य ही स्नान और दान का पुण्य अर्जित करना चाहिए | क्योंकि , इन्हीं नदियों का जल सबसे पवित्र है | इन सबमें माघ स्नान भगवना शिव के लिए , वैशाख स्नान भगवान विष्णु के लिए और कार्तिक स्नान भगवान ब्रहा के लिए होता है | यह भी परंपरा है कि त्रिदेव के निमित्त किए जाने वाले स्नान पर्व के मध्य स्नान करने से मनुष्य के पाप तो दूर होंगे ही , साथ ही साथ जन्मों के किया गये पाप भी धुल जाते हैं |

कार्तिक माह में स्नान का माहात्म्य क्यों ?

कार्तिक माह के माहात्म्य के विषय में एक प्राचीन धारण मिलती है | कार्तिक स्नान ब्रहा के प्रति अर्चना है | विष्णु जी के प्रति किया गया स्नान उज्जैनी , त्रयम्बकेश्वर  और कावेरी तीर्थो में सपंन्न होते हैं | वहीं शिव के प्रति अर्पित स्नान हरिद्धार , कुरुक्षेत्र , रेणुका तीर्थ , गढ़गंगा , प्रयाग संगम , काशी व गया में किये जाते हैं | ब्रहा के लिए स्नान का एकमात्र स्थान तीर्थराज पुष्कर में निर्धारित हुआ है | पुष्कर का अर्थ एक ऐसे सरोवर से है , जिसकी रचना एक पुष्प से हुई थी |

सभी पवित्र तीर्थ स्थलों में जहां दीपावली पर्व की अमावस्या को यमराज की प्रसन्नता के लिए दीपदान किए जाते हैं , वहां रेणुका तीर्थ , गढ़गंगा , हरिद्धार , प्रयाग , काशी व पटना आदि में लोकाचार के अनुसार स्नान होते हैं | मान्यता है कि वैशाख स्नान और माघ स्नान से  निवृत हो जाएं , तो कार्तिक स्नान किए बिना उनका पुण्य नहीं मिलता है | स्नान करने का अभिप्राय यही है कि जब माघ स्नान, वैशाख स्नान और कार्तिक स्नान पूर्ण हो जाएं , तभी जाकर चार धाम का पुण्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है |

प्रिय पाठकों ! वैदिक यम नियम के अधीन हिन्दू जगत के 16 संस्कार और 10 कर्मो में एक कर्म स्नान भी है | प्रत्येक वर्ष वैशाख , कार्तिक और माघ मास में पूर्णिमाओं के मध्य पड़ने वाले पक्षों में पवित्र स्नान आयोजित होते हैं | धर्म की अधरशीलता में व्रत उपवास और तिथि पर्व पर पवित्र नदियों का स्नान महत्वपूर्ण है |

गंगा , यमुना , गोदावरी , सरस्वती , नर्मदा , सिन्धु और कावेरी - ये सात नदियां ऐसी हैं , जिनमे प्रतिवर्ष स्नानों के मध्य यात्रा करके अवश्य ही स्नान और दान का पुण्य अर्जित करना चाहिए | क्योंकि , इन्हीं नदियों का जल सबसे पवित्र है | इन सबमें माघ स्नान भगवना शिव के लिए , वैशाख स्नान भगवान विष्णु के लिए और कार्तिक स्नान भगवान ब्रहा के लिए होता है | यह भी परंपरा है कि त्रिदेव के निमित्त किए जाने वाले स्नान पर्व के मध्य स्नान करने से मनुष्य के पाप तो दूर होंगे ही , साथ ही साथ जन्मों के किया गये पाप भी धुल जाते हैं |