28 Mar

नवरात्र के दो अर्थ बतलाए गए हैं - प्रथम नव का अर्थ है नौ रातें , दूसरे नव का अर्थ है - नया अर्थात् नई रातें । नवरात्र वर्ष में दो बार आते हैं । प्रथम चैत्र मास में दूसरा पर्व आश्विन मास में आता है ।दुर्गा सप्तशती में देवी माहात्म्य का वर्णन करते हुए कहा गया है - देवी ने इस विश्व को उत्पन्नकिया है और वे जब भी प्रसन्न होती हैं तब मनुष्यों को मोक्ष प्रदान कर देती हैं । देवी दुर्गा नव विद्दा है , इसलिए उनकी उपासना के लिए नौ दिन निश्चित किया गया है ।

नवरात्र पूजन प्रतिपदा से लेकर नवमी तक चलता है । इस पूजन के लिए नौ दिन ही क्यों नियत किये गए हैं । इस विषय में अलग - अलग तर्क दिए जाते हैं । नवरात्र सम्पूर्ण वर्ष के दिनों का 40 वां भाग है । अर्थात अगर वर्ष के 360 दिनों का 9 की संख्या से भाग करें , तो हमें 40 नवरात्र प्राप्त होंगे । 40 दिनों का एक मंडल कहलाता है जप भी 40 दिन तक किए जाते हैं । इस प्रकार इन नवरात्रों में 4 नवरात्र देवी भगवत पुराण के अनुसार महत्वपूर्ण बताए गए हैं । जिनमें से शारीदय एवं वासंतिक नवरात्र का ही अधिक महत्व है । इस दृष्टि से भी शक्ति की उपासना 9 दिन करना ही उचित अनुभव होता है ।

तृतीय शक्ति के तीन गुण हैं - सत्व , रजस और तम । इनको तिगुना करने पर 9 की संख्या प्राप्त होती हैं । जिस प्रकार यजोपवीत में तीन बड़े धागे होते हैं और उन तीनो में प्रत्येक धागा तीन तीन धागों से होता है । उसी प्रकार प्रकृति , योग एवं माया का त्रिवृत रूप नवविध ही होता है । दुर्गा की उपासना में उसके सम्रग रूप की आरधना हो सके , इसी उद्देश्य से नवरात्र के नौ दिन निश्चित किए गए हैं ।

दुर्गा सप्तशती में देवी के सोलह रूपों का वर्णन किया गया है । लेकिन मूर्तियों में उनके नौ ही स्वरूप हैं । देवी भागवत और वराह पुराण में भी नौ दुर्गा के नौ रूपों की चर्चा की गई है , जिन्हें नव दुर्गा कहा जाता है । देवी के उग्र और शांत दोनों ही रूप हमें देखने को मिलते हैं । शांत रूप में ऊर्ष्मा , उर्षा , गौरी , अम्बिका आदि देवियों का उल्लेख है । इसलिए भी नौ रूपों के प्रतीक नवरात्र मनाए जाते हैं ।

दुर्गा जो की हिमालय की पुत्री मानी जाती है उसे अपने घर बुलाने के लिए उनकी मां ने प्रार्थना की और दुर्गापति भगवान शिव ने वर्ष में केवल नौ दिन के लिए ही यह आज्ञा दी । इन नौ दिनों में भगवती दुर्गा विश्व में विचरण करती है और इस उपलक्ष्य में अपने घर आई पुत्री की पूजा पूरे भारत में शक्ति आरधना के रूप में सम्पन्न की जाती है ।