छोटी दीवाली

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चौदस की छोटी दीवाली होती है । दिन में आटे , तेल , हल्दी का उबटन बनाएं और उसे लगायें । बाद में लोग पट्टे   के नीचे तेल का दीया जलाकर गर्म पानी से सिर सहित नहायें । भोजन करने से पहले इस प्रकार की पूजा  करें। एक थाली में पूजा की साम्रगी एक कच्चा दीया , एक चौमुखा दीया और तेरह छोटे दीये लगायें । उनमे तेल बत्ती डाल दें ।

पूजा की साम्रगी और दिये , गद्दी के लिए और घर के लिए अलग अलग जलायें । जिनकी पूजा कर दिये पर जल , रोली , चावल , गुड़ , धूप , अबीर , गुलाल , फूल , चार सुहाली , दक्षिणा चढ़ाये । शाम को पहले गद्दी की पूजा करें । बाद में घर आकर पूजन करें । सारी साम्रगी चढ़ा दें । घर पर भी इसी प्रकार पूजा करने के बाद सारे कमरों में , रसोई में , चौक में , सीढ़ी में रख दें । गणेशजी व लक्ष्मीजी के आगे धूप कर दें ।

 

बड़ी दीवाली

पुराणों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि लक्ष्मी जी का पूजन भगवान् नारायण ने बैकुंठ में सबसे पहले किया , वैसे यह त्यौहार त्रयादेशी , धन तेरस से शुरू हो कर दितीय , भैया दूज तक चलता है । इस दिन  लक्ष्मीजी के साथ श्रीगणेश के पूजन की पंरपरा है । लक्ष्मीजी बनाने के दिन सुबह दीवार को चूने से पोत लें और यदि किसी के कई रंग की बनती हो तो रंग से बना लें नहीँ तो गेरू से गणेश जी बना लें ।

हनुमानजी तथा पित्तरों की धोक मारते जायें और अगर आपके कोई देवता मानते हों तो उसकी भी पूजा करें । सब लोग साथ में जल , मोली , रोली ,चावल , अबीर , गुलाल , फूल , नारियल , निकाली हुई मिठाई , दक्षिणा , धूप बत्ती , दियासलाई यह सब सामान साथ लें जायें । पितरों की और हनुमान जी की धोंक  मारने के बाद घर में ठाकुर जी के मन्दिर में , पैण्डे पर धोक मारें, और किसी को पैसे न दें । गणेश जी लक्ष्मीजी की  मिट्टी  की मूर्ति बाजार से लाये जिसको  लाकर रात को घर में पूजा करें । हलवे पूरी की रसोई बनांए ।

बाद में सब तरह की सामग्री और ग्यारह पूड़ी एक थाली में सब पितरो की निकल दें और वह ब्राह्मण को दे दें । एक ब्राह्मण भी जिमा दे । बाद में आप जीम लें ।

दीवाली की पूजन सामग्री

दीवाली की पूजन सामग्री में दो कच्चे दीये , दो चारमुख वाले दीय - बीच में रख दोनों कोनों में तीस छोटे दीये रख दें । दीये में तेल डालकर , बत्ती डालकर दीये जला लें । बाद में मोली , रोली , चावल , फूल , गुड़ , अबीर , गुलाल , धूप , चार , सुहाली , गुड़ , दक्षिणा चढ़ाये और फेरी दें । पहले पुरुष पूजा करें , बाद में स्त्रियां । पूजा करने के बाद सब कमरो में , चौक में , रसोई में रख दें । एक चार मुख वाला दीया और छः छोटे दीये लक्ष्मीजी जहां बनायें वही पर उसे रख दें । औरतें  लक्ष्मीजी का व्रत कर पूजा करने के बाद जीम और तिजोरी ( गल्ले ) में गणेशजी लक्ष्मीजी रखे । पूजा करने के बाद एक आपकी  जितनी श्रद्धा हो , उतने रूपये बहुओ को दें । वहां पर एक बड़ा दीया रखकर उसमें घी डालकर , नाल की बत्ती डालकर जलायें । रात को बारह बजे पूजा करें और दूसरा पट्टा बिछाकर उस पर एक लाल कपड़ा बिछायें और एक जोड़ी मंगाया हुआ गणेश - लक्ष्मीजी रखें । पास ही रुपये , सवा सेर चावल गुड़ , चार केले , मूली , हरी गवार फली , दक्षिणा , चार सुहाली डालकर रख दें । एक थाली में पांच लड्डू सारी सामग्री सहित गणेश जी का पूजन करके लड्डुओं से जिमा दें । दीये का काजल सब स्त्री , पुरषों की आंखों में लगाना चाहिए । सारे दीयो की रातभर निगरानी रखें । उस पर छलनी ढक दें । सारे दीयों  को रातभर जलाकर सुबह उठाकर चढ़वा तो मिसरानी को दे दें और रुपये उठाकर तिजोरी में रख दें । बड़ी दीवाली को रात के बारह बजे पूजा करने के बाद चूने अथवा गेरू में रुई भिगोकर , चक्की , चूल्हा , लोहा तथा छाज पर तिलक लगाना चाहिए ।

प्रातः काल चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर एक बेलन से छाज बजाते जाओ और  जाओ लक्ष्मी जी आओ , लक्ष्मी जी आओ । दरिद्र जाओ और दरिद्र जाओ । बाद में छाज और कूड़ा घर के आगे डाल दें और बेलन पीछे लाकर रख दें । इसके बाद लक्ष्मीजी की कहानी सुनें ।

 

लक्ष्मी जी कहानी ( पहली कहानी )

किसी नगर में एक साहूकार की बेटी थी । वह रोज पीपल सींचने जाती थी । पीपल में से लक्ष्मी जी निकलती और चली जाती । एक दिन लक्ष्मीजी ने साहूकार की बेटी से कहा कि तू मेरी सहेली बन जा । तब लड़की ने कहा मैं अपने पिताजी से पूछकर कल आऊंगी , घर जाकर पिताजी को सारी बात कह दी तो  बोले वह तो लक्ष्मी है । अपने को क्या चाहिए , बन जा । दूसरे दिन वह लड़की ने कहा - बन जाऊंगी । और दोनों सहेली बन गई । लक्ष्मी जी ने उसको खाने का न्योता दे दिया ।

घर आकर लड़की ने अपने बाप से कहा कि मेरी सेहली ने मुझे खाने का न्योता दिया है । तब बाप से कहा कि सेहली के जीमन पर घर संभालकर  जाइयो । जब वह लक्ष्मीजी के यहां जीमने गई तो लक्ष्मी जी ने दुशाला ओढ़ने के लिए दिया , रूपये परखने के लिए दिये । जीमकर  जब वह जाने लगी तो लक्ष्मीजी ने पल्ला पकड़ लिया और कहा कि मैं भी तेरे घर जीमने आऊंगी । उसने कहा -आ जाइयो । घर जाकर चुपचाप बैठ गई । तब बाप ने पूछा कि बेटी सेहली के यहां जीम कर आई है और उदास क्यों बैठी है ? तो उसने कहा पिताजी मेरे को लक्ष्मी जी ने इतना दिया , अनेक प्रकार के भोजन कराए परन्तु मैं कैसे जीमाऊंगी ? अपने घर में तो कुछ भी नहीँ है । फिर बाप ने कहा की जैसे होगा जिमा देंगे ।

तू गोबर - मिट्टी से चौका लिपकर सफाई कर ले । चार मुख वाला दीया जलाकर लक्ष्मी जी का नाम लेकर बैठ जाइयो । लड़की सफाई करके लड्डू लेकर बैठ गई । उसी समय एक रानी नहा रही थी । उसका नौलखा हार चील उठाकर ले गई और उसका लड्डू ले गई और वह नौलखा हार डाल गई । बाद  में वह हार  तोड़कर बाजार में गई और सामान लाने लगी तो सुनार ने पूछा कि क्या चाहिए । तब उसने कहा कि सोने की चौकी , सोने का थाल ,दुशाला दे दें मोहर दें और सारी सामग्री दें । छतीस प्रकार का भोजन हो जाए इतना सामान दें सारी चीजें लाकर बहुत तैयारी करी और रसोई बनाई तब गणेशजी से कहा कि लक्ष्मीजी को बुलाओ । आगे आगे गणेशजी और पीछे पीछे लक्ष्मी जी आई। उसने फिर चौकी डाल दी और कहा - सहेली चौकी पर बैठ जा । जब लक्ष्मी जी ने कहा - सहेली चौकी पर तो राजा रानी भी नहीँ बैठे , कोई भी नहीँ बैठा तो उसने कहा कि मेरे यहां तो बैठना पड़ेगा , मेरे मां - बाप , भाई भतीजे , मेरे पोते - बहुएं क्या सोचेंगी ?

लक्ष्मीजी की सहेली बनी थी , अठाईस पीढ़ियों तक यहीं पर रहना पड़ेगा । फिर लक्ष्मी जी चौकी पर बैठ गई । तब उसने बहुत खातिर की , जैसे लक्ष्मीजी ने की वैसे ही उसने की । लक्ष्मी जी उस पर खुश हो गई । और घर में खूब रूपया धन लक्ष्मी हो गई । साहूकार की बेटी ने कहा मैं अभी आ रही हूं । तुम यहीँ बैठी रहना और  वह चली गई ।

लक्ष्मीजी गई नहीँ और चौकी पर बैठी रही । उसको बहुत धन दौलत दिया । हे लक्ष्मी माता ! जैसे तुमने साहूकार की बेटी को दिया वैसा सबको देना । कहते - सुनते हुंकार भरते अपने सारे परिवार को दियो , पीहर में देना , सुसराल में देना । बेटे ,पोते को देना । हे लक्ष्मी माता ! सब दुख दूर करना , दरिद्रता दूर करना । दीवाली  के दिन धोक खाओ । औरतें अपनी सासुजी और नन्द को पैर छूकर रुपये देती जायें और में लड्डू दें ।